छत्तीसगढ़

कृषकों को रासायनिक खाद वितरण प्रारंभ

Shantanu Roy
24 May 2026 11:56 PM IST
कृषकों को रासायनिक खाद वितरण प्रारंभ
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छग
Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। किसानों द्वारा खरीफ की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। जिले में इस वर्ष उर्वरक वितरण हेतु 47530 में टन का लक्ष्य प्राप्त हुआ है तथा वर्तमान में 21326 में टन उर्वरक का उपलब्ध हैं जो कि लक्ष्य के विरुद्ध 45 प्रतिशत उर्वरक जिले में उपलब्ध है एवं जिले में सहकारी एवं निजी क्षेत्र में 16914 में टन उर्वरक का भण्डारण किया जा चुका है जो लक्ष्य के विरुद्ध 30 प्रतिशत भण्डारण हो चुका है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को लगातार उर्वरकों का वितरण प्रारम्भ हो चुका है।
आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए कृषि विभाग ने सहकारी समितियां के माध्यम से उर्वरकों का वितरण कार्य प्रगतिरत है। यूरिया पिछले साल की कुल मात्रा का 80 प्रतिशत भी पारंपरिक यूरिया के रूप में पहले मिलेगा। शेष 20 प्रतिशत आपूर्ति होने पर दिया जायेगा, अन्यथा उसकी जगह नैना यूरिया का विकल्प रहेगा। डीएपी पिछले वर्ष की मात्रा का 60 प्रतिशत ही मिलेगा, शेष 40 प्रतिशत मात्रा अन्य वैकल्पिक एनपीके खाद या नैनो डीएपी के माध्यम से पूर्ति किया जायेगा।
उप संचालक कृषि आशुतोष श्रीवास्तव के द्वारा सभी उर्वरक विक्रेताओं को खरीफ 2026 में सभी वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने एवं कृषकों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। इस संबंध में विगत दिनों सभी निजी उर्वरक विक्रेताओं की बैठक आयोजित कर नियमानुसार उर्वरक का व्यवसाय करने हेतु निर्देश दिया गया हैं। विभाग द्वारा अनुदानित उर्वरकों यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी. एसएसपी के साथ किसी अन्य सामग्री की टैगिंग प्रतिबंधित की गई है।
जिला में निगरानी समिति का गठन कर उर्वरकों की बिक्री पर कड़ी नजर रखते हुए उर्वरकों के अवैध भंडारण, जमाखोरी, कालाबाजारी, अधिक दर आदि के संबंध में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं उर्वरक गुण नियंत्रण आदेश 1985 के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की जा रही हैं। अभी तक जिले में 44 विक्रय केन्द्रों का निरीक्षण किया जा चुका है। जिसमे से 1 उर्वरक विक्रेताओं का प्राधिकार पत्र निलंबन की कार्यवाही की गयी है तथा 26 विक्रेताओं को कारण बताओं नोटिस जारी किया गया है। जिले में अभी तक कुल खाद के 15 नमूना एवं बीज का 24 नमूना प्रयोगशाला को प्रेषित की जा चुकी हैं। ताकि किसानों को समय पर उच्च गुणवत्तायुक्त खाद एवं बीज उपलब्ध हो सके।
वैज्ञानिकों द्वारा सतत् कृषि विकास हेतु एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन की अनुशंसा की गयी है। जिसके अंतर्गत रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ अन्य उपाय जैसे जैव उर्वरक, जैव खाद, हरी खाद, नील हरित शैवाल, एजोस्पिरिलियम, पीएबी, इत्यादि के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु कृषि विभाग द्वारा व्यापक तैयारी की गई है। विमान में हरी खाद के बीज (देंचा) का भण्डारण प्रारंभ कर दिया गया है। कृषकों से नील हरित शैवाल का उत्पादन कराया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक की अनुशंसा अनुसार उर्वरक उपयोग संबंधी पोस्टर एवं पाम्पलेट वितरित किए जा रहे है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे डीएपी की 01 बोरी के बराबर पोषक तत्व अन्य विकल्पों से भी प्राप्त किये जा सकते हैं।
किसानों को सुझाव दिया जाता है कि 01 बोरी डीएपी के स्थान पर 03 बोरी एसएसपी के साथ या 20 किग्रा अमोनियम सल्फेट का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा 01 बोरी टीएसपी के साथ 72 बोतल नैनो यूरिया 500 मिली. और 02 बोतल नैनी डीएपी 500 मिली. ही प्रभावी विकल्प है, जिससे डीएपी की खपत कम होगी तथा फसल को संतुलित पोषक तत्व प्राप्त होंगे। जिले में उर्वरकों की उपलब्धता के दृष्टिगत उप संचालक कृषि द्वारा सलाह दी गई है कि वह उर्वरकों का अत्याधिक क्रय एवं उनके प्रयोग से बचे तथा निकटस्थ समिति अथवा निजी विक्रय केन्द्रों से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा के अनुसार फसल एवं रकबा के आधार पर उर्वरक का उठाव करें।
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